उन की भी शफ़ा'अत मेरे सरकार करेंगे / Un Ki Bhi Shafaa'at Mere Sarkaar Karenge
उन की भी शफ़ा'अत मेरे सरकार करेंगे जो रौज़ा-ए-सरकार का दीदार करेंगे मैं क़ब्र में कह दूँगा फ़रिश्तों से कि जाओ अब जो भी करेंगे, मेरे सरकार करेंगे बीमार हूँ मैं, 'आबिद-ए-बीमार के दर का और मेरी दवा 'आबिद-ए-बीमार करेंगे रमज़ान में हो जाए जो आक़ा का इशारा हम लोग मदीने में ही इफ़्तार करेंगे जब उम्मती रो रो के पुकारेंगे नबी को सरकार कहाँ ऐसे में इंकार करेंगे ! जो ऊँगली उठाएगा बरेली के रज़ा पर उस का तो इलाज अज़हरी सरकार करेंगे अख़लाक़ की तलवार हमें दी है नबी ने क्या ले के हम अब लोहे की तलवार करेंगे घेरा है बलाओं ने मेरे घर को, मुझे भी अब दूर इने सय्यिद-ए-सालार करेंगे शादाब ! यही नात के अश'आर को पढ़ कर घर अपने लिए ख़ुल्द में तैयार करेंगे शायर: शादाब रज़ा कानपुरी नात-ख़्वाँ: शादाब रज़ा कानपुरी un ki bhi shafaa'at mere sarkaar karenge jo rauza-e-sarkaar ka deedaar karenge mai.n qabr me.n kah doonga farishto.n se ki jaao ab jo bhi karenge, mere sarkaar karenge beemaar hu.n mai.n, 'aabid-e-beemaar ke dar ka aur meri dawa 'aabid-e-beemaar karenge ...